रुद्राक्ष धारण विधि
धारण विधि:
- रुद्राक्ष धारण करने से पहले स्नान कर लें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- रुद्राक्ष को शुद्ध गंगा जल / साफ जल से पवित्र करें और "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हुए इसे पहनें।
- इसके बाद श्रद्धा और विश्वास के साथ रुद्राक्ष धारण करें।
- हर रुद्राक्ष को पहनने का अलग-अलग तरीका होता है, जिसकी जानकारी हम आपको देते हैं।
- ध्यान रखें कि रुद्राक्ष को हमेशा पवित्र भावना और नियमों के अनुसार ही पहना जाना चाहिए।
उपयोग के सुझाव
- सभी वर्ग के लोग रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं।
- सिर में रुद्राक्ष धारण करके स्नान करने से गंगा स्नान के समान फल प्राप्त होता है।
- रुद्राक्ष पहनने वाला व्यक्ति जितना शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध होगा, उतना ज्यादा फल मिलेगा।
- जिस रुद्राक्ष माला से जप करें, उसे गले में धारण नहीं करना चाहिए।
- जो रोज रुद्राक्ष धारण या उसका पूजन करते हैं, वे राजा की तरह धनवान होते हैं।
- बिना रुद्राक्ष धारण किए स्नान, दान, जप, होम, प्रार्थना और दीक्षा अगर किया जाता है, तो इसका सही फल नहीं मिलता।
- शिव को प्रसन्न करने और शिव साधना में सफलता पाने के लिए रुद्राक्ष का रुद्राक्ष का दान देना या पहनना श्रेष्ठ माना गया है।
- रुद्राक्ष के दर्शन से पुण्य मिलता है, इसके स्पर्श से करोड़ों पुण्य, इसे धारण करने से सौ करोड़ पुण्य और इसके जाप से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
- जिसके गले में मृत्यु के समय रुद्राक्ष होता है, वह निश्चय ही शिव लोक की ओर जाता है।
- शिव पुराण के अनुसार, सिर पर रुद्राक्ष धारण करने से एक करोड़, कान में दस करोड़, गले में सौ करोड़ और कलाई पर रुद्राक्ष पहनने से पूर्ण मोक्ष मिलता है।
नियम और शर्तें
- अपवित्र अवस्था में रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए।
- रुद्राक्ष को अटूट विश्वास और श्रद्धा के साथ धारण करने पर चालीस दिन के भीतर कार्य सिद्धि होती है।
- रुद्राक्ष धारण करते हुए व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से शुद्ध होना चाहिए।
- हर व्यक्ति विशेष पर रुद्राक्ष धारण करने के अलग-अलग असर हो सकते हैं।
- रुद्राक्ष के अच्छे या बुरे परिणाम का फल आपके प्रारब्ध और कर्मों के आधार पर होगा।
- रुद्राक्ष को शमशान घाट या अस्पताल में नहीं पहनकर जाना चाहिए।